Nana Patekar Unknown Facts
Nana Patekar Unknown Facts

नाना पाटेकर बॉलीवुड के उन दिग्गज कलाकारों में से एक रहे हैं, जिनका न सिर्फ दमदार अभिनय बल्कि असल जीवन भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा है। अपनी बेबाकी, कड़क आवाज और सादगी भरे जीवन के लिए मशहूर नाना के जीवन से जुड़े कई ऐसे दिलचस्प और अनसुने राज हैं, जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

एग्रीमेंट में लिखवाते थे डायरेक्टर से झगड़े की शर्त

नाना पाटेकर अपनी बेबाकी और पूरी ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। उनके बारे में यह बेहद दिलचस्प किस्सा मशहूर है कि वे जिस भी डायरेक्टर के साथ काम करते थे, उनके साथ किसी न किसी बात पर वैचारिक मतभेद या बहस होना आम बात थी। इसी वजह से, जब वे कोई फिल्म साइन करते थे, तो मज़ाक-मज़ाक में या अपने बेबाक अंदाज़ में एग्रीमेंट के दौरान यह तक कह देते थे कि फिल्म की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर से कम से कम एक बार झगड़ा ज़रूर होगा। वे कभी भी किसी गलत बात से समझौता नहीं करते थे।

बिना स्क्रिप्ट के बोला था क्रांतिवीर का 3.30 मिनट का धमाकेदार डायलॉग

फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में उनका “आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने…” वाला साढ़े तीन मिनट का वह प्रसिद्ध भाषण आज भी आइकॉनिक माना जाता है। बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इस सीन के लिए नाना पाटेकर के पास कोई पहले से लिखित स्क्रिप्ट नहीं थी। उन्होंने कैमरे के सामने पूरी बेबाकी और सहजता से वह लंबा और दमदार डायलॉग बिना किसी स्क्रिप्ट के अपने दिल से बोला था, जिसे देखकर सब हैरान रह गए थे।

क्रांतिवीर के क्लाइमेक्स से पहले आ गई थी दिल की बीमारी

फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म के क्लाइमेक्स की शूटिंग से ठीक पहले नाना पाटेकर को दिल से जुड़ी समस्या हो गई थी, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। जब निर्देशक उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे, तो नाना ने कहा था कि अगर उन्हें कुछ हो गया तो न सिर्फ क्लाइमेक्स बल्कि पूरी फिल्म अधूरी रह जाएगी। उन्होंने डॉक्टर की निगरानी में और एक ही दिन में चार कैमरों की मदद से उस ऐतिहासिक क्लाइमेक्स की शूटिंग पूरी करवाई थी।

कचरा फेंकने वाले को रास्ते में कार रोककर लगाई थी क्लास

नाना पाटेकर अपनी असल जिंदगी में भी बेहद अनुशासित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक थे। एक बार का उनका यह किस्सा बहुत मशहूर है कि जब वे रास्ते से गुजर रहे थे, तब उन्होंने देखा कि किसी शख्स ने चलती गाड़ी से बाहर कचरा या प्लास्टिक की बोतल फेंक दी। नाना ने तुरंत अपनी कार रुकवाई, उस व्यक्ति के पास गए और उसे टोका कि उसने बोतल बाहर क्यों फेंकी है।

डेढ़ करोड़ की लग्जरी कार छोड़, किसानों को बांटे थे पैसे

वरिष्ठ लेखक रणबीर पुष्प ने एक इंटरव्यू में बताया था कि नाना पाटेकर एक बार अपने लिए डेढ़ करोड़ रुपये की एक लग्जरी कार खरीदने वाले थे। लेकिन उसी दौरान जब उन्होंने महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित और आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों की बदहाली देखी, तो उनका दिल पूरी तरह पसीज गया। उन्होंने तुरंत कार खरीदने का विचार छोड़ दिया और वह पूरी रकम गरीब किसान परिवारों की मदद के लिए दान कर दी।बाद में उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ (NAAM Foundation) की स्थापना की, जिसके जरिए हज़ारों किसानों को नया जीवन मिला।

मुंबई पुलिस के लिए बनाते थे अपराधियों के स्केच

नाना पाटेकर ने मुंबई के प्रसिद्ध सर जे. जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से कमर्शियल आर्ट्स की पढ़ाई की थी। फिल्मों में आने से पहले, वे एक बेहतरीन स्केच आर्टिस्ट थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि वे अपनी इस कला के जरिए मुंबई पुलिस की मदद किया करते थे। जब कोई चश्मदीद किसी अपराधी का हुलिया बताता था, तो नाना उसका सटीक स्केच तैयार करते थे, जिससे पुलिस को अपराधियों को पकड़ने में काफी मदद मिलती थी।

कारगिल युद्ध के समय सेना के साथ बिताए थे 60 दिन

फिल्म ‘प्रहार’ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने कोई ऊपरी ट्रेनिंग नहीं ली, बल्कि उन्होंने बकायदा तीन साल तक इंडियन आर्मी की टेरिटोरियल आर्मी विंग में कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी की थी। आर्मी ने उन्हें ‘कैप्टन’ की मानद रैंक से भी सम्मानित किया था।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि साल 1999 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध छिड़ा, तब नाना पाटेकर अपना स्टारडम छोड़कर खुद बॉर्डर पर गए और करीब 60 दिनों तक सैनिकों के साथ रहे और उनका हौसला बढ़ाया।

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