मेघना गुलजार अपनी फिल्मों में गंभीर और संवेदनशील मुद्दों को अलग अंदाज में पेश करती हैं। तलवार और राजी जैसी फिल्मों के बाद अब वह दायरा लेकर आई हैं। फिल्म में करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिकाओं में हैं। दायरा एक रेप केस और न्याय के सवालों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म का मुद्दा मजबूत है, लेकिन क्या यह दर्शकों पर प्रभाव छोड़ पाती है?

दायरा की कहानी क्या है?

दायरा की कहानी रमन कुमार और अजूनी नाम के दो पुलिस अधिकारियों के आसपास बुनी गई है। रमन कुमार की भूमिका पृथ्वीराज सुकुमारन ने निभाई है। वहीं, अजूनी के किरदार में करीना कपूर नजर आती हैं। दोनों एक रेप केस से जुड़े हैं। हालांकि, मामले को देखने का दोनों का नजरिया अलग है।

शहर में रागिनी नाम की लड़की के साथ रेप होता है। इसके बाद उसकी जली हुई लाश बरामद होती है। परिवार न्याय की उम्मीद में पुलिस के पास पहुंचता है। रमन कुमार परिवार को न्याय दिलाने के लिए अपने तरीके अपनाते हैं। उनके तरीके सही हैं या गलत, इसकी जांच के लिए एसआईटी गठित होती है। इसकी जिम्मेदारी अजूनी को दी जाती है।

फिल्म का मुद्दा कितना मजबूत है?

फिल्म की कहानी तीन अलग-अलग पहलुओं के जरिए आगे बढ़ती है। पहला पहलू पीड़ित परिवार के दर्द को दिखाता है। दूसरा रमन कुमार के नजरिए पर केंद्रित है। तीसरा अजूनी की जांच और उनके सवालों को सामने रखता है।

मेघना गुलजार इन तीनों पहलुओं से कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती हैं। मुद्दा काफी गंभीर और प्रभावशाली है। हालांकि, फिल्म इन सवालों के जवाब तलाशने में खुद उलझ जाती है। इसका असर कहानी की पकड़ पर दिखाई देता है।

कमजोर स्क्रीनप्ले और एडिटिंग बनी परेशानी

तीनों कहानियों को साथ लेकर चलने की कोशिश कमजोर पड़ती है। किसी भी कहानी को पर्याप्त गहराई नहीं मिल पाती। एडिटिंग भी कई जगह फिल्म की रफ्तार को प्रभावित करती है। कहानी एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर तेजी से पहुंचती रहती है।

इस वजह से दर्शक पीड़ित परिवार के दर्द से पूरी तरह नहीं जुड़ पाते। रमन कुमार का नजरिया भी पूरी तरह प्रभावशाली नहीं बनता। वहीं, अजूनी के किरदार से भी मजबूत जुड़ाव नहीं हो पाता।

स्क्रीनप्ले भी फिल्म की कमजोर कड़ियों में शामिल है। कहानी कागज पर प्रभावशाली नजर आती है। लेकिन पर्दे पर इसका असर उतना मजबूत नहीं दिखाई देता।

करीना और पृथ्वीराज की एक्टिंग कैसी है?

अभिनय की बात करें तो करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन ने अच्छा काम किया है। दोनों अपने किरदारों में प्रभावी नजर आते हैं। हालांकि, करीना को पृथ्वीराज की तुलना में कम स्क्रीन स्पेस मिला है।

सपोर्टिंग कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है। जितेंद्र जोशी और कमलजीत सिंह अपने किरदारों में प्रभावी हैं। प्रगति मिश्रा, विश्वापति सरकार और अनुजा साठे का काम भी अच्छा है।

दायरा रिव्यू: देखें या नहीं?

कुल मिलाकर, दायरा का मुद्दा मजबूत है और फिल्म जरूरी सवाल उठाती है। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और एडिटिंग इसका प्रभाव कम कर देते हैं। मेघना गुलजार की यह फिल्म एक औसत अनुभव बनकर रह जाती है।

दायरा रेटिंग: ⭐⭐/5

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