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असली नाम से लेकर समोसे बेचने तक, जानें SRK की जिंदगी के अनसुने राज़

Happy Birthday Shah Rukh Khan : हिंदी सिनेमा को अपनी दिलकश अदाकारी, रोमांस और जादू से सींचने वाले बॉलीवुड के ‘बादशाह’ यानी शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। दिल्ली के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले ‘किंग खान’ ने अपनी मेहनत, लगन और कभी हार न मानने वाले जज्बे के दम पर ग्लोबल स्टारडम हासिल किया है। शाहरुख खान के जन्मदिन के इस खास मौके पर आइए नजर डालते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे बेहद दिलचस्प, अनसुनी और भावुक कर देने वाले किस्सों पर, जिन्हें शायद उनके कट्टर फैंस भी पूरी तरह नहीं जानते होंगे। शाहरुख खान के जीवन से जुड़े 6 अनसुने और दिलचस्प किस्से

असली नाम ‘अब्दुल रहमान’ था

बहुत कम लोग यह जानते हैं कि जन्म के बाद शाहरुख खान की नानी ने उनका नाम ‘अब्दुल रहमान’ रखा था। हालांकि, यह नाम कहीं ऑफिशियल रजिस्टर्ड नहीं हुआ, लेकिन बचपन में कुछ समय तक वे इसी नाम से जाने जाते थे। बाद में उनके पिता ने उनका नाम बदलकर ‘शाहरुख’ रखा, जिसका फारसी में अर्थ होता है ‘राजा जैसा चेहरा’।

पहली सैलरी ₹50 और समोसे बेचने का कनेक्शन

  • पहली कमाई: शाहरुख ने अपने जीवन में पहली बार दिल्ली में पंकज उधास के एक कॉन्सर्ट में गाइड (अशर) के तौर पर काम किया था, जिसके बदले उन्हें ₹50 मिले थे। इन पैसों से उन्होंने ट्रेन का टिकट खरीदा और ताजमहल देखने गए थे।
  • थिएटर में समोसे खिलाना: जब शाहरुख लगभग 10 साल के थे, तब उनके पिता दिल्ली के मशहूर ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ (NSD) में कैंटीन चलाते थे। शाहरुख वहां बड़े-बड़े थिएटर आर्टिस्ट्स को नाश्ते के ब्रेक में समोसे परोसा करते थे।

3. मां की मौत और वो आखिरी दुआ

शाहरुख जब 15 साल के थे तब उनके पिता का और जब 26 साल के थे तब उनकी मां का निधन हो गया था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बेहद भावुक किस्सा साझा किया था कि जब उनकी मां दिल्ली के बत्रा अस्पताल में वेंटिलेटर पर थीं, तो वे पार्किंग में बैठकर लगातार दुआ पढ़ रहे थे। किसी ने उनसे कहा था कि अगर वे सौ से ज्यादा बार दुआ पढ़ेंगे तो मां बच जाएंगी। शाहरुख ने सौ से भी ज्यादा बार दुआ पढ़ी, लेकिन जब वे आईसीयू में गए तो मां दुनिया छोड़ चुकी थीं। इसी गहरे दुख से उबरने और मां के सपने को पूरा करने के लिए वे मुंबई आए थे।

नंबर ‘555’ का क्रेज और अजीब आदतें

  • 555 का जादू: शाहरुख खान को अंक ‘555’ से बेहद लगाव है। उनकी हर गाड़ी की नंबर प्लेट पर आपको यही अंक दिखेगा। यहां तक कि उनके स्टाफ के कई लोगों के मोबाइल नंबर में भी 555 आता है।
  • इस्तरी किए हुए पजामे: शाहरुख रात को हमेशा साफ और अच्छी तरह आयरन किए हुए पजामे पहनकर सोते हैं। उनका मानना है कि ‘इंसान को अपने सपनों में भी अच्छा दिखना चाहिए’।
  • आइसक्रीम से दूरी: जहां दुनिया को आइसक्रीम पसंद है, वहीं किंग खान को आइसक्रीम का स्वाद बिल्कुल पसंद नहीं है और वे इससे दूर ही रहते हैं।

खुद सिनेमाघर की खिड़की पर बेचे थे टिकट

साल 1994 में जब उनकी फिल्म ‘कभी हां कभी ना’ रिलीज हुई, तो शाहरुख खुद मुंबई के एक सिनेमाघर की बुकिंग विंडो (टिकट काउंटर) पर जाकर बैठ गए और अपने हाथों से दर्शकों को फिल्म के टिकट बेचे। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पूरी फिल्म के लिए उन्हें महज 25,000 रुपये की फीस मिली थी।

स्कूल में फेल होने के डर से सीखी हिंदी

बचपन में शाहरुख की हिंदी बहुत कमजोर थी और वे स्कूल के एग्जाम्स में अच्छे नंबर नहीं ला पाते थे। तब उनकी मां ने उनसे वादा किया था कि अगर वे हिंदी में पूरे नंबर लाएंगे, तो वे उन्हें सिनेमाघर में फिल्म दिखाने ले जाएंगी। फिल्मों के प्रति दीवाने शाहरुख ने उसी दिन से कड़ी मेहनत शुरू की और हिंदी में टॉप करने लगे।

शाहरुख खान के वे विचार, जो उन्हें बनाते हैं ‘विचारों का बादशाह’

अपनी बेहतरीन एक्टिंग और चार्म के अलावा शाहरुख खान अपनी हाजिरजवाबी और गहरी सोच के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी ये बातें उनकी जिंदगी और सफलता का असली फलसफा बयां करती हैं:

  1. “भ्रमित होना ठीक है। भ्रम से ही संसार में स्पष्टता के सारे रास्ते खुलते हैं।”
  2. “मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि मैं सिर्फ अपनी मौजूदगी से लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला सकता हूं।”
  3. “मैं अपने फैंस के साथ अच्छी तरह पेश आता हूं और उनमें यकीन करता हूं, क्योंकि उन्होंने मुझे रोजगार दिया है।”
  4. “सामान्य होने जैसा दुनिया में कुछ नहीं है, सामान्य होना प्राणहीनों की दुनिया है।”
  5. “रिश्ते प्यार को मार डालते हैं, रिश्ते नियमों से बंधे होते हैं, और नियमों की गलत व्याख्या हो सकती है।”
  6. “दिमाग रचनाशीलता का बीज है, लेकिन दिल मिट्टी है, खुले दिल के बिना वो बीज बढ़ नहीं सकता।”
  7. “अपने डर को कभी ऐसे बक्से में मत बदलने दो जिसमें आप बंद हो जाओ। उन्हें खुला छोड़ दो, महसूस करो और उसे अपनी सामर्थ्य अनुसार सबसे बड़े साहस में बदल दो।”

एक लोअर मिडिल क्लास के लड़के से ‘किंग खान’ तक का सफर

2 नवंबर 1965 को नई दिल्ली में जन्मे शाहरुख खान ने बिना किसी फिल्मी गॉडफादर के इंडस्ट्री में कदम रखा। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस लड़के ने अपने सपनों को कभी सीमित नहीं होने दिया। अपनी अटूट लगन, मेहनत और करिश्माई व्यक्तित्व से उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो पूरी दुनिया आपके कदमों में झुक सकती है।

आज जन्मदिन के इस खास मौके पर हम यही कामना करते हैं कि हमारे चहेते ‘बादशाह’ यूं ही हमेशा हंसते रहें और अपने अभिनय से सिल्वर स्क्रीन पर जादू बिखेरते रहें। हैप्पी बर्थडे, शाहरुख खान!

Richa Mishra Tiwari
Richa Mishra Tiwari
रिचा मिश्रा तिवारी Film Window की हिंदी एंटरटेनमेंट कवरेज का प्रमुख नाम हैं। बॉलीवुड की ताज़ा खबरें, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, सोशल मीडिया पर फिल्मों का रिएक्शन, बिग बॉस और सितारों से जुड़े कानूनी मामले, सब कुछ सरल और साफ़ हिंदी में। Richa Mishra Tiwari writes Film Window's Hindi coverage of Bollywood, box office and celebrity news.
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