Andhra Chainsaw Attack Row : फिल्ममेकर संदीप रेड्डी वांगा (Sandeep Reddy Vanga) एक बार फिर सोशल मीडिया पर छिड़ी एक बड़ी बहस के केंद्र में आ गए हैं। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के रापताडू स्थित जिला परिषद हाई स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा गोपिका पर हेमंत (21 वर्ष) नामक युवक द्वारा इलेक्ट्रिक चेनसॉ (इलेक्ट्रिक आरी) से किए गए जानलेवा हमले की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी ने छात्रा द्वारा उसके प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद इस खौफनाक कदम को अंजाम दिया।
इस दर्दनाक घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने इसकी तुलना संदीप रेड्डी वांगा की साल 2023 की ब्लॉकबस्टर और विवादित फिल्म ‘एनिमल’ (Animal) के उस मशहूर सीन से करनी शुरू कर दी, जिसमें रणबीर कपूर बंदूक लेकर अपनी बहन के कॉलेज की क्लासरूम में घुस जाते हैं। फिल्म पर हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप लगते ही संदीप रेड्डी वांगा ने चुप्पी तोड़ी है और आलोचकों को आड़े हाथों लिया है।
क्या था आंध्र प्रदेश का मामला और क्यों घिरी ‘एनिमल’?
अनंतपुर जिले के स्कूल में हुई इस जघन्य घटना ने पूरे देश में बच्चों और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 साल के आरोपी हेमंत ने 10वीं कक्षा की छात्रा गोपिका पर हमला करने के लिए एक इलेक्ट्रिक चेनसॉ का इस्तेमाल किया।
घटना के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया कि फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा और हथियारों का क्लासरूम/स्कूल सेटिंग में इस्तेमाल युवाओं पर गलत असर डाल रहा है। आलोचकों ने विशेष रूप से वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ के क्लासरूम सीन और रणवीर सिंह स्टारर आगामी फिल्म ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों का हवाला देते हुए सिनेमा में हिंसा के महिमामंडन (Heroic Representation of Violence) को जिम्मेदार ठहराया।
संदीप रेड्डी वांगा का करारा जवाब: “निजी दुश्मनी निकालने का गंदा बहाना”
सोशल मीडिया पर लगातार हो रहे हमलों के बाद संदीप रेड्डी वांगा ने अपने ऑफिशियल X (ट्विटर) हैंडल पर एक लंबा-चौड़ा बयान जारी कर अपने आलोचकों की क्लास लगाई।
वांगा ने लिखा जब भी कोई व्यक्ति ऐसा जघन्य अपराध करता है, तो पहली प्रतिक्रिया सहानुभूति (Empathy) और उस बड़ी समस्या को समझने की होनी चाहिए, न कि सिनेमा में किसी आसान बलि का बकरा ढूंढने की।”
आलोचकों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने आगे कहा:
“यह बात पूरी तरह से साफ होती जा रही है कि आपकी चिंता पीड़ितों या उनके परिवारों के लिए नहीं है। बल्कि आप इस भयानक त्रासदी का इस्तेमाल मुझसे अपनी निजी दुश्मनी (Personal Scores) निकालने के लिए एक गंदे बहाने के रूप में कर रहे हैं। यह जवाब विशेष रूप से उन असफल, हताश, बेरोजगार अभिनेताओं/अभिनेत्रियों, कुछ निर्देशकों, निर्माताओं और परजीवियों (Parasites) के लिए है, जो किसी और के काम पर उंगली उठाने का मौका मिलते ही अचानक खुद को समाज सुधारक घोषित कर लेते हैं। एक त्रासदी सहानुभूति की हकदार होती है, अवसरवादिता (Opportunism) की नहीं। अंतर समझिए।”
इंटरनेट और दर्शकों की दोहरी राय
संदीप रेड्डी वांगा के इस कड़े बयान के बाद भी सोशल मीडिया पर सिनेमा की जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज है, इंटरनेट पर उपयोगकर्ताओं और फिल्म समीक्षकों के एक वर्ग का तर्क है कि फिल्म निर्माताओं को यह समझना होगा कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज का आईना भी है। जब बड़े पर्दे पर हिंसक हथियारों और हिंसा को मसीहा की तरह (Heroic) पेश किया जाता है, तो इसका असर सीधे तौर पर समाज पर पड़ता है।
आलोचना की लपेट में अन्य मेकर्स: यह आलोचना सिर्फ वांगा तक सीमित नहीं है। हिंसक और डार्क कंटेंट बनाने वाले अन्य फिल्ममेकर्स को भी इस बात पर विचार करने की सलाह दी जा रही है कि वे पर्दे पर हिंसा को किस तरह से पेश करते हैं। क्या आप संदीप रेड्डी वांगा के इस बयान या ‘एनिमल’ से जुड़े पिछले विवादों पर कोई और अपडेट जानना चाहते हैं?

