Ramayana Set Design Secrets : रणबीर कपूर (राम), यश (रावण) और साई पल्लवी (सीता) स्टारर नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ (Ramayana: Part 1) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म की चर्चा सिर्फ इसकी भारी-भरकम स्टारकास्ट और 4,000 करोड़ रुपये के बजट को लेकर ही नहीं है, बल्कि इसके अकल्पनीय और भव्य सेट्स ने भी पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
आखिर पर्दे पर दिखने वाली यह जादुई और पौराणिक दुनिया कैसे तैयार हुई? रावण का सिंहासन बनाने में कितना खर्च आया? और पुष्पक विमान जैसी विशाल संरचनाओं को स्टूडियो में कैसे फिट किया गया? इन सभी सवालों के जवाब फिल्म के आर्ट डायरेक्टर रमेश ने एक खास इंटरव्यू में दिए हैं, जिसमें उन्होंने पर्दे के पीछे की कई दिलचस्प और हैरान करने वाली बातें साझा की हैं।
कैसे मिली रमेश को ‘रामायण’ जैसी मेगा फिल्म?
रमेश के लिए ‘रामायण’ कोई पहला प्रोजेक्ट नहीं है, वह इससे पहले ‘बड़े मियां छोटे मियां’, ’83’, ‘टाइगर जिंदा है’ और ‘शोरगुल’ जैसी 30 से ज्यादा फिल्मों में आर्ट डायरेक्शन का काम कर चुके हैं।जब उन्हें इस फिल्म के बारे में पता चला, तब वह प्रतीक गांधी की वेब सीरीज ‘गांधी’ पर काम कर रहे थे। इंडस्ट्री में चर्चा थी कि हॉलीवुड से एक बड़े प्रोडक्शन डिजाइनर भारत आ रहे हैं और ‘रामायण’ पर एक भव्य फिल्म बनने जा रही है।
रमेश भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना चाहते थे। इसी बीच अमेरिका में मौजूद प्रोडक्शन डिजाइनर रामजी (Ramzi) ने उनका इंटरव्यू जूम (Zoom) पर लिया। रमेश का पिछला काम और पोर्टफोलियो पसंद आने के बाद उन्हें तुरंत इस मेगा प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया।

150 से ज्यादा सेट्स और अप्रैल 2024 से शुरू हुआ निर्माण
इस फिल्म की भव्यता रातों-रात तैयार नहीं हुई। इसके पीछे लंबी और कड़ी मेहनत शामिल है।
रमेश की टीम फरवरी 2024 में इस प्रोजेक्ट से जुड़ी और अप्रैल 2024 से सेट्स का निर्माण शुरू हुआ। किसी भी सेट का फाइनल रूप एक बार में नहीं आता; स्क्रीन पर जो दिखता है, उससे पहले उसके 10-15 अलग-अलग वर्जन और बदलावों पर काम किया जाता है।

फिल्म के लिए कुल 150 से ज्यादा सेट्स तैयार किए गए हैं। ये सभी सेट्स मुंबई की फिल्म सिटी स्थित प्राइम फोकस के स्टूडियो में बनाए गए हैं। खास बात यह है कि शूटिंग के हिसाब से सेट तैयार किए जाते हैं, वहां शूटिंग होती है और फिर उन्हें हटाकर अगले सेट का निर्माण किया जाता है। इतना ही नहीं, फिल्म के दूसरे पार्ट की शूटिंग की तैयारी भी साथ-साथ शुरू हो चुकी है।
सिर्फ ग्रीन स्क्रीन नहीं, हर चीज हाथों से की गई तैयार
आजकल फिल्मों में वीएफएक्स और सीजीआई (CGI) का बोलबाला है, जहां ग्रीन स्क्रीन के सामने शूटिंग कर बाद में कंप्यूटर से सब बनाया जाता है। लेकिन ‘रामायण’ में इस पारंपरिक तरीके से हटकर काम किया गया।
Ramayana Set Design Secrets: जानिए पूरी खबर
प्रोडक्शन डिजाइनर और आर्ट डिपार्टमेंट ने हर चीज की बारीकी पर काम किया। फ्लोरिंग का टेक्सचर हो, दीवारों की बनावट हो या सोने के मोटिफ्स, हर छोटी चीज को हाथों से तैयार किया गया। बाहर से केवल कच्चा माल आता था, बाकी सारा काम टीम ने अपनी क्रिएटिविटी से स्टूडियो में ही किया।

1 करोड़ का रावण का सिंहासन और 24 कैरेट गोल्ड की फिनिशिंग
फिल्म में लंकापति रावण का सिंहासन सबसे बड़े आकर्षणों में से एक है। इसे तैयार करने में टीम को पूरे चार महीने का समय लगा। सबसे पहले मिट्टी से इसका क्ले मॉडल तैयार किया गया, फिर मोल्ड निकालकर फाइबर की मदद से इसे आकार दिया गया।
इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी गोल्ड फिनिशिंग थी। सिंहासन पर 24 कैरेट गोल्ड लीफिंग की गई है। सिर्फ इस एक सिंहासन को तैयार करने में लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत आई।
शूर्पणखा का रथ और 24 फीट ऊंचा जटायु मॉडल
शूर्पणखा का रथ: इसे बनाने में करीब तीन महीने लगे और इसकी लागत लगभग 1.5 करोड़ रुपये आई। चुनौती सिर्फ इसे भव्य बनाना नहीं बल्कि इसे वर्किंग कंडीशन (चलने की स्थिति) में रखना था, ताकि वजन और डिजाइन संतुलित रहे।
जटायु का स्केलेटन: कलाकारों की आंखों का स्तर (Eye-level) और सटीक डायलॉग डिलीवरी बनी रहे, इसके लिए सेट पर 24 फीट ऊंचा जटायु का स्केलेटन मॉडल तैयार किया गया था, ताकि एक्टर्स को उसके आकार का सही अंदाजा मिल सके।

50 फीट का पुष्पक विमान: चार हिस्सों में हुआ तैयार
फिल्म के सबसे चुनौतीपूर्ण क्रिएशंस में पुष्पक विमान शामिल है। इसका आकार इतना विशाल था कि इसे एक बार में किसी स्टूडियो के अंदर फिट करना असंभव था। निर्देशक नितेश तिवारी पिछले छह साल से इसके डिजाइन पर काम कर रहे थे। डिजाइन फाइनल होने के बाद आर्ट डिपार्टमेंट ने इसे चार अलग-अलग हिस्सों में तैयार किया। पुष्पक विमान का डायामीटर (व्यास्) करीब 50 फीट था, जिसे टीम ने महज 40 से 50 दिनों के भीतर सफलतापूर्व जमीन पर उतार दिया।
एक सेट पर 600 लोग और क्राउड सीन्स में 1,000 कलाकार
फिल्म के पैमाने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब लंका का विशाल सेट तैयार हो रहा था, तब एक समय में 500 से 600 लोग वहां लगातार काम कर रहे थे। वहीं, एक बड़े क्राउड सीक्वेंस के दौरान सेट पर 800 से 1,000 डांसर्स और जूनियर आर्टिस्ट मौजूद थे।
निर्देशक नितेश तिवारी का परफेक्शन
आर्ट डायरेक्टर रमेश बताते हैं कि निर्देशक नितेश तिवारी अपने काम को लेकर बेहद अनुशासित और गंभीर हैं। शूटिंग से एक दिन पहले वह खुद सेट पर आते और रेकी करते थे। हर शॉट पहले से प्लान होता था, जिसके चलते कभी ऐसा तनाव नहीं आया कि निर्देशक को सेट पर आकर नाराजगी जतानी पड़े। मेकर्स की तरफ से क्वालिटी को लेकर पूरी छूट मिली थी, जिसका नतीजा आज पर्दे पर भव्यता के रूप में नजर आ रहा है।

