Nana Patekar Funera : दिग्गज और बेबाक अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक निधन से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वाले गहरे सदमे में हैं। गोवा में दिल का दौरा पड़ने से हुए निधन के बाद, उनके पार्थिव शरीर को पुणे के पास उनके फार्महाउस पर लाया गया था, जहां गुरुवार देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और हजारों फैंस की मौजूदगी में उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे करने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल थे, जिस पर खुद उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने आगे आकर पूरी सच्चाई साझा की है।
आधी रात को क्यों किया गया अंतिम संस्कार?
पुणे के डोंजे गांव स्थित फार्महाउस के बाहर मौजूद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए मल्हार पाटेकर ने अंतिम संस्कार में हुई देर की वजह साफ की। उन्होंने बताया कि गोवा से पार्थिव शरीर को गांव के फार्महाउस तक लाने में उम्मीद से ज्यादा समय लग गया था। मल्हार ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा:”हम गोवा में थे और उनके पार्थिव शरीर को गांव के फार्महाउस पर लाया जाना था।
हमें उम्मीद थी कि यह थोड़ा पहले पहुंच जाएगा, लेकिन इसमें कुछ समय लग गया। चूंकि यह दुखद घटना सुबह-सुबह ही हो चुकी थी और काफी समय बीत चुका था, इसलिए हमने फैसला किया कि अंतिम संस्कार आज ही (गुरुवार को) किया जाना चाहिए।” महाराष्ट्र सरकार के पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई।
“नाना साहब कभी हमें छोड़कर नहीं जा सकते…”
अपने पिता के निधन के बाद उनके सफर और विरासत को याद करते हुए मल्हार पाटेकर बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर जैसे लोग अपने बेहतरीन कार्यों और विचारों की वजह से कभी नहीं मरते, वे हमेशा अमर रहते हैं।मल्हार ने आगे कहा:”नाना साहब जैसा व्यक्ति कभी हमें छोड़कर नहीं जाता। वे अपने काम के जरिए हमेशा अमर रहेंगे।
उनकी सोच हमेशा एक जैसी थी; वे अक्सर कहा करते थे कि ‘आइए मानवता के नाम पर एकजुट हों और दुनिया की भलाई के लिए काम करें।’ हमारी संस्था (नाम फाउंडेशन) के जरिए जल संरक्षण पर काम पहले से ही चल रहा था, और कश्मीर में शिक्षा तथा स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी पहल भी शुरू हो चुकी थीं। इसके अलावा, जाने से पहले उन्होंने हर किसी को अपनी खास जिम्मेदारियां भी सौंप दी थीं।”
सिनेमा के एक गौरवशाली अध्याय का अंत
गोवा में गुरुवार सुबह सीने में अचानक बेचैनी महसूस होने पर नाना पाटेकर ने अपने एक दोस्त को फोन किया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। उनका इस तरह अचानक चले जाना कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनके विचार, उनकी सादगी और उनके सामाजिक कार्य हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।







