Amitabh Bachchan Birthday Special
Amitabh Bachchan Birthday Special

Amitabh Bachchan Birthday Special: : हिंदी सिनेमा के ‘शहंशाह’ और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनकी गूंजती हुई भारी आवाज (Baritone Voice), उनकी दमदार शख्सियत और पर्दे पर उनका गुस्सा या जज्बा आज भी करोड़ों दिलों पर राज करता है। बिग बी का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम रोमांचक और संघर्षों से भरा नहीं रहा है। आज उनके जन्मदिन के इस खास अवसर पर आइए विस्तार से जानते हैं उनके जीवन से जुड़े उन तमाम पन्नों, संघर्षों और अनसुने किस्सों को, जो उनकी सफलता की असली दास्तान बयां करते हैं।

‘इंकलाब’ से अमिताभ बनने तक की कहानी

वर्ष 1942 में जब देश में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ चल रहा था और चारों तरफ ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे गूंज रहे थे, तब माहौल से प्रभावित होकर परिवार में बच्चे का नाम ‘इंकलाब’ रखने की चर्चा हुई थी। हालांकि, बाद में खुद अमिताभ बच्चन ने एक साक्षात्कार और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में स्पष्ट किया था कि उनका आधिकारिक नाम बचपन से ही ‘अमिताभ’ रहा है। उनके पिता हरिवंश राय बच्चन के करीबी मित्र और कवि सुमित्रानंदन पंत ने इस बच्चे का नाम ‘अमिताभ’ रखने का सुझाव दिया था। ‘अमिताभ’ का अर्थ होता है— “वह प्रकाश जो कभी न बुझे या न ढले”

बच्चन उपनाम: हरिवंश राय जी अपना उपनाम ‘बच्चन’ लिखते थे, जिसे उन्होंने परिवार के सरनेम के रूप में आगे बढ़ाया।

जब ऑल इंडिया रेडियो (AIR) ने कर दिया था रिजेक्ट

आज जिस भारी, गूंजती और दमदार बैरिटोन आवाज के बिना सिनेमा की कल्पना भी नहीं की जा सकती, शुरुआती दिनों में उसी आवाज ने उन्हें मायूस किया था। युवावस्था में अमिताभ बच्चन ने ऑल इंडिया रेडियो में रेडियो अनाउंसर बनने के लिए ऑडिशन दिया था, लेकिन उनकी इस भारी आवाज को यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि यह रेडियो के एयरवेव्स के लिए उपयुक्त नहीं है। इसी तरह, मशहूर रेडियो हस्ती अमीन सयानी से मिलने के लिए वे बिना अपॉइंटमेंट के रेडियो स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन व्यस्तता के चलते सयानी साहब उन्हें उस समय वक्त नहीं दे पाए थे।

कोलकाता की 1600 रुपये की नौकरी छोड़ने का बड़ा रिस्क

फिल्में में कदम रखने से पहले अमिताभ बच्चन कोलकाता में एक प्राइवेट नौकरी (बर्ड एंड कंपनी – Bird and Co.) करते थे, जहां उन्हें हर महीने 1,600 रुपये मिलते थे। उस दौर में यह एक अच्छी खासी और सुरक्षित सैलरी हुआ करती थी। उनके पास एक स्थिर नौकरी और बढ़िया जीवनशैली थी।

प्रसिद्ध अभिनेत्री नरगिस ने उनकी मां तेजी बच्चन के कहने पर उनके लिए एक स्क्रीन टेस्ट का बंदोबस्त किया था (मनोज कुमार की फिल्म ‘साजन’ के लिए)। हालांकि उन्हें वह फिल्म नहीं मिली, लेकिन उस स्थिर और सुरक्षित नौकरी को छोड़कर मुंबई का रुख करना एक साधारण व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा और जोखिम भरा कदम था। शुरुआती दिनों में कई निर्देशकों ने उन्हें उनकी दुबली-पतली काया और अलग कद-काठी की वजह से खारिज भी कर दिया था।

वो जादुई आवाज, जिसने बिना चेहरा दिखाए बना ली पहचान

अमिताभ बच्चन के करियर की एक और बड़ी खासियत उनकी वह भारी और दमदार आवाज है, जिसने सिनेमा जगत में इतिहास रच दिया। बिना चेहरा दिखाए सिर्फ अपनी आवाज के जादू से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने का हुनर सिर्फ बिग बी के पास ही है।

कम ही लोग जानते हैं कि साल 1969 में मृणाल सेन की फिल्म ‘भुवन शोम’ (Bhuvan Shome) रिलीज हुई थी, जिसमें अमिताभ बच्चन ने मुख्य अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि कथा वाचकर (Narrator) के रूप में काम किया था। फिल्म के शुरुआती क्रेडिट्स में उनका नाम सिर्फ ‘अमिताभ’ के रूप में आया था। इसके बाद उन्होंने ‘सात हिंदुस्तानी’ से अपने अभिनय सफर की आधिकारिक शुरुआत की।

साल 1971 में ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘आनंद’ ने उनके अभिनय को एक नई पहचान दी, जहां सुपरस्टार राजेश खन्ना की मौजूदगी के बावजूद अमिताभ ने अपनी अमिट छाप छोड़ी। इसके बाद उन्होंने ‘बावर्ची’ और ‘बालिका बधु’ जैसी फिल्मों में भी अपनी शानदार आवाज से नैरेटर की भूमिका निभाई।

‘एंग्री यंग मैन’ से लेकर हर दिल अजीज बनने तक का सफर

70 के दशक का दौर अमिताभ बच्चन के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। साल 1972 से 1975 के बीच ‘जंजीर’, ‘अभिमान’, ‘नमक हराम’, ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’ और ‘मिली’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उन्हें रातों-रात देश का सबसे बड़ा स्टार बना दिया। ‘एंग्री यंग मैन’ की छवि ने उन्हें जनता के दिलों में अमर कर दिया।

फिल्म ‘कुली’ का वह भयानक हादसा और देश की प्रार्थनाएं

साल 1982 में फिल्म ‘कुली’ की एक फाइट सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान सह-कलाकार पुनीत इस्सर के साथ हुई दुर्घटना में उन्हें पेट पर गंभीर और जानलेवा चोट लग गई थी। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई थी कि पूरा देश उनकी सलामती की दुआ मांग रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी विशेष तौर पर अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जानने पहुंची थीं।

दिवालियापन, 90 करोड़ का कर्ज और शानदार कमबैक

साल 1999 में उनकी कंपनी ABCL (अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड) आर्थिक संकट के चलते बुरी तरह डूब गई थी, जिससे वे लगभग 90 करोड़ रुपये के भारी कर्ज और अनगिनत मुकदमों के दलदल में फंस गए थे। ऐसे बुरे वक्त में अपने संकोच को ताक पर रखकर वे सीधे फिल्मकार यश चोपड़ा के पास काम मांगने गए। यश चोपड़ा ने उन्हें फिल्म ‘मोहब्बतें’ में कास्ट किया और टेलीविजन पर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) ने उनकी किस्मत का पासा पूरी तरह पलट दिया। इस शानदार वापसी के दम पर उन्होंने एक-एक रुपया चुकाकर अपने सिर का सारा कर्ज उतारा।

आज पांच दशकों से अधिक लंबे इस सुनहरे सफर में अमिताभ बच्चन ने अभिनय के साथ-साथ गायन (जैसे ‘मिताभ’ एल्बम और विभिन्न फिल्मों के गाने) और वॉइस ओवर में जो आयाम गढ़े हैं, वे बेमिसाल हैं। कोलकाता की उस 1600 रुपये की नौकरी को छोड़कर मुंबई की सड़कों पर संघर्ष करने का उनका वह फैसला और जीवन की हर बाधा को पार करने की उनकी जिजीविषा आज भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे स्वर्णिम अध्याय है। जन्मदिन के इस खास अवसर पर हम महानायक के अदम्य जज्बे को शत-शत नमन करते हैं!

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