बॉलीवुड में हमेशा लीक से हटकर विषयों पर फिल्में बनाने वाले अभिनेता आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) एक बार फिर अभिनेत्री सारा अली खान (Sara Ali खान) के साथ बड़े पर्दे पर लौट आए हैं। निर्देशक आकाश कौशिक के निर्देशन में बनी यह फिल्म ‘उठता दिल है सत्य’ (Utta Dil Hai Satya) सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। जब इस फिल्म का ट्रेलर सामने आया था, तभी यह साफ हो गया था कि यह एक ऐसे पाकिस्तानी एजेंट (बिलाल) की कहानी है जो भारत में खुफिया मिशन पर आता है, लेकिन यहां एक हादसे में अपनी याददाश्त खो बैठता है। इसके बाद वह भारत में रहकर ही देश के प्रति अपनी वफादारी दिखाने लगता है—यानी यह एक ऐसी स्पाय-थ्रिलर है जिसमें कॉमेडी का भरपूर तड़का है। आइए जानते हैं सिनेमाघरों में यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी है।
कहानी का प्लॉट और शुरुआत
फिल्म की शुरुआत होते ही शुरुआती 10 से 15 मिनट आपको थोड़े उलझन में डाल सकते हैं। कहानी की नींव रखने और प्लॉट को समझाने के लिए लिया गया यह शुरुआती वक्त थोड़ा सुस्त महसूस होता है और आपको हल्का सा बोर कर सकता है।
लेकिन, असली खेल तब शुरू होता है जब आयुष्मान खुराना का किरदार (बिलाल) अपनी याददाश्त खो देता है। फर्स्ट हाफ का यह हिस्सा इतना मजेदार है कि इसमें मौजूद कॉमिक पंचेस और बेहतरीन वन-लाइनर्स पर आप थिएटर में हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे। यह भाग देखकर ऐसा लगता है कि फिल्म बेहद शानदार साबित होने वाली है।
सेकंड हाफ में भटकाव और तालमेल की कमी
फिल्म का दूसरा हाफ उम्मीदों पर थोड़ा पानी फेर देता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह थोड़ा खिंचा हुआ (Stretched) लगने लगती है। सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि फिल्म अचानक से एक गंभीर (Serious) देशभक्ति वाले ट्रैक पर मुड़ जाती है। फर्स्ट हाफ की हल्की-फुल्की कॉमेडी सेकंड हाफ में आते-आते धीरे-धीरे कम होने लगती है।
स्पाय थ्रिलर और कॉमेडी का जो एक बेहतरीन संतुलन (Balance) दोनों हाफ के बीच होना चाहिए था, निर्देशक आकाश कौशिक उसे पूरी तरह से साधने में असफल नजर आते हैं। हालांकि, समकालीन राजनीतिक परिदृश्य (Political Scenario) पर तंज कसने वाले कुछ डायलॉग्स बेहद तीखे और शानदार लिखे गए हैं, जो आपका ध्यान खींचते हैं।
कलाकारों का अभिनय (किसने मारी बाजी?)
आयुष्मान खुराना: बिलाल के किरदार में आयुष्मान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे ऐसे उलझे हुए और कॉमिक किरदारों में कितने फिट बैठते हैं। उनका अभिनय फिल्म की जान है।सारा अली खान: अभिनेत्री सारा अली खान के पास इस फिल्म में करने के लिए बहुत ज्यादा स्पेस या स्कोप नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने हिस्से का काम ठीक-ठाक निभाया है।
सपोर्टिंग कास्ट: फिल्म के सहायक कलाकार इसकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुए हैं। आयुष्मान के साथ सोहेल नायर ने बेहद शानदार और दमदार काम किया है। इसके अलावा मुकुल देव का अभिनय भी बेहतरीन है। राहुल बोस का किरदार काफी मजेदार है, जबकि सुप्रिया पिलगांवकर, गुलशन कुमार और राम कपूर जैसे अनुभवी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों के साथ पूरी न्याय किया है।
रेटिंग
कुल मिलाकर, ‘उठता दिल है सत्य’ एक दिलचस्प, नए और अलग कॉन्सेप्ट पर बनी स्पाय-कॉमेडी फिल्म है। इसका पहला हाफ आपको एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव की पूरी उम्मीद जगाता है, लेकिन सेकंड हाफ में ट्रैक बदलने और कसावट की कमी के कारण यह उतनी पावरफुल नहीं बन पाती जितनी उम्मीद की जा रही थी। अगर आप आयुष्मान खुराना की कॉमिक टाइमिंग और एक अलग जॉनर की फिल्म देखना पसंद करते हैं, तो इस वीकेंड इसे एक मौका दिया जा सकता है।
⭐ रेटिंग: 3 / 5 स्टार






