Sona Mohapatra on Daler Mehndi Controversy
Sona Mohapatra on Daler Mehndi Controversy

Sona Mohapatra on Daler Mehndi Controversy : उत्तराखंड के कुंजापुरी मेले में प्रसिद्ध पंजाबी गायक दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) की परफॉर्मेंस और राज्य के मंत्री सुबोध उनियाल के साथ हुए विवाद के मामले में अब गायिका सोना महापात्रा (Sona Mohapatra) की भी एंट्री हो गई है। जहाँ एक तरफ मिका सिंह, कपिल शर्मा और बादशाह जैसे कई सितार दलेर मेहंदी के समर्थन में उतरे हैं, वहीं सोना महापात्रा ने इस मामले में एक अलग और संतुलित पक्ष रखते हुए कलाकारों की व्यावसायिक जवाबदेही (Professional Accountability) पर सवाल खड़े किए हैं। आइए जानते हैं सोना महापात्रा ने अपने पोस्ट में क्या-क्या कहा है।

दिल्ली के सूफी फेस्टिवल का अनुभव और निराशा

सोना महापात्रा ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट शेयर करते हुए दिल्ली में आयोजित दूसरे ‘सूफी हेरिटेज फेस्टिवल’ (Sufi Heritage Festival) के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि वह और उनकी टीम दलेर मेहंदी का एक अलग सूफी-केंद्रित सेट देखने के लिए रुकी थी।

लेकिन उस परफॉर्मेंस को देखकर वे काफी निराश हुईं। सोना ने दावा किया कि:

  • परफॉर्मेंस के दौरान दलेर मेहंदी थोड़े भटके हुए (disoriented) नजर आ रहे थे।
  • वे नोट्स पकड़ने में संघर्ष कर रहे थे और बार-बार एक ही म्यूजिकल फ्रेश को दोहरा रहे थे।
  • कार्यक्रम में टिकट खरीदकर आए कई दर्शक इस स्थिति को देखकर धीरे-धीरे वहां से जाने लगे थे।

सोना ने लिखा कि उस समय उन्होंने और उनकी टीम ने सम्मान के चलते चुप्पी साधे रखी, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि क्या उनकी वह चुप्पी सही थी? उन्होंने लिखा, “हम असहज और दुखी थे, लेकिन चुप रहे—सिर्फ सम्मान के कारण। क्या वह वाकई सम्मान था? या हम अपनी चुप्पी के जरिए किसी ऐसी चीज को बढ़ावा दे रहे थे जिस पर सवाल उठाया जाना चाहिए था?”

“सम्मान कोई वन-वे हक नहीं है, ऑडियंस को भी मिले ईमानदारी”

सोना महापात्रा ने स्पष्ट किया कि एक तरफ जहां वरिष्ठ कलाकारों को उनके जीवनभर के योगदान के लिए गरिमा और सहानुभूति मिलनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ दर्शकों को भी एक ईमानदार परफॉर्मेंस का पूरा हक है।

उन्होंने आगे कहा, “दो बातें एक साथ सच हो सकती हैं। एक दिग्गज कलाकार सम्मान का हकदार है, और एक दर्शक को भी ईमानदार परफॉर्मेंस की उम्मीद करने का हक है, या कम से कम यह स्वीकार करने का हक है कि जब ऐसा संभव न हो तो क्या स्थिति है।”

सोना ने यह भी कहा कि अगर कोई कलाकार अस्वस्थ है, तो इस स्थिति को पूरी करुणा और जिम्मेदारी के साथ संभाला जाना चाहिए। “यह स्वीकार्य नहीं हो सकता कि दर्शक और आयोजक बार-बार परिणाम भुगतें और बाकी सब लोग आंखें फेर लें।”

मंत्री के व्यवहार और परफॉर्मेंस की गुणवत्ता को अलग रखना

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए सोना ने कहा कि मंत्री ने जिस तरह से स्थिति को संभाला, वह एक अलग मुद्दा है। उन्होंने कहा कि वह इस बात पर टिप्पणी नहीं कर सकतीं कि मंत्री का तरीका सही था या नहीं, लेकिन मुख्य मुद्दा परफॉर्मेंस की गुणवत्ता और दर्शकों के अधिकार का है।

सोना ने कहा, “मैं एक साथी कलाकार के रूप में यह बात कह रही हूँ, यह जानते हुए भी कि मेरी आलोचना हो सकती है। सम्मान कोई वन-वे हक नहीं है। यह आपसी आदान-प्रदान (reciprocity) का रिश्ता है।” उन्होंने दलेर मेहंदी के महान योगदान का सम्मान करते हुए अंत में सवाल किया कि “लेकिन निश्चित रूप से, हम अपने दर्शकों का भी कुछ सम्मान करते हैं, है न?”

उत्तराखंड विवाद की पृष्ठभूमि

आपको बता दें कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब टिहरी जिले के कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस के दौरान उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर आ गए थे और उन्होंने शो रुकवाते हुए आरोप लगाया था कि गायक ने शराब के नशे में मंच पर प्रवेश किया है। बाद में मंत्री ने यह भी दावा किया था कि इस इवेंट के लिए दलेर को 35 लाख रुपये दिए गए थे और वे लिप-सिंक कर रहे थे। हालांकि, मिका सिंह और परिवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जबकि सोना महापात्रा ने इस पूरी बहस में कलाकारों और दर्शकों के बीच की जवाबदेही पर बड़ा सवाल उठाया है।

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