Tiger Shroff Firing Case : बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) पर हुए फायरिंग मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि इन हमलावरों ने टाइगर पर हमला करने की साजिश एक हफ्ता पहले यानी 11 अक्टूबर को ही रची थी, लेकिन उनका वह प्लान फेल हो गया था। इसके अलावा आरोपियों को इस खतरनाक काम को अंजाम देने के लिए 50,000 रुपये एडवांस और विदेश में नौकरी का लालच दिया गया था। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी डिटेल।
अक्टूबर को क्यों फेल हुआ था हमलावरों का पहला प्लान?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए तीनों आरोपी—रेहान, फूल सिंह (नाबालिग) और ऋतिक कुमार—11 अक्टूबर को ही मुंबई के जुहू स्थित पुष्पा नारसी पार्क (Pushpa Narsee Park) पहुंच गए थे। वे अभिनेता टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने की फिराक में थे।
लेकिन उनका प्लान इसलिए फेल हो गया क्योंकि उस दिन टाइगर श्रॉफ अपना नियमित फुटबॉल मैच खेलने के लिए मैदान पर नहीं आए थे। जब टाइगर वहां नहीं पहुंचे, तो हमलावरों को मजबूर होकर अपना वह प्लान टालना पड़ा और वे वापस लौट गए। इसके ठीक एक हफ्ते बाद, यानी 18 अक्टूबर को वे दोबारा उसी जगह पर आए और इस बार उन्होंने अभिनेता की बीएमडब्ल्यू (BMW) कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
50,000 रुपये एडवांस और विदेश में नौकरी का लालच
जांच में यह भी सामने आया है कि इन साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लड़कों को इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए भारी प्रलोभन दिए गए थे:
- एडवांस रकम: पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमलावरों को इस फायरिंग को अंजाम देने के लिए कुल 50,000 रुपये एडवांस के रूप में दिए गए थे।
- विदेश में नौकरी का झांसा: इन्हें पैसों के अलावा विदेश (या अन्य जगहों पर) में अच्छी नौकरी दिलवाने का सपना दिखाया गया था, जिसके जाल में फंसकर इन्होंने इस जुर्म की दुनिया में कदम रखा। एक आरोपी की मां ने भी मीडिया के सामने यह बात कही कि उनके बेटे को बहला-फुसलाकर इस गलत रास्ते पर फंसाया गया था।
18 अक्टूबर की घटना और ड्राइवर की बहादुरी
18 अक्टूबर को योजना के मुताबिक, तीनों आरोपी दोपहर करीब 4:30 बजे से ही फुटबॉल ग्राउंड के आसपास चक्कर काट रहे थे और रेकी कर रहे थे। शाम करीब 7 बजे जब टाइगर श्रॉफ फुटबॉल खेलकर अपनी बीएमडब्ल्यू कार से बाहर निकल रहे थे, तब दो हमलावरों ने गाड़ी पर आगे और साइड से गोलियां चला दीं, जबकि तीसरा आरोपी मोटरसाइकिल लेकर बाहर तैयार खड़ा था ताकि फायरिंग के बाद तुरंत भागा जा सके।
इस हमले में टाइगर के वफादार ड्राइवर फिरदौस इब्राहिम बलूच (जो पिछले 28 साल से उनके परिवार के साथ हैं) के बाएं हाथ की कलाई पर गोली लग गई और उनकी उंगली भी फ्रैक्चर हो गई। इसके बावजूद सूझबूझ दिखाते हुए घायल ड्राइवर गाड़ी से उतरे और तुरंत टाइगर श्रॉफ ने खुद स्टीयरिंग संभाली तथा उसी हालत में कार को सीधे सांताक्रूज पुलिस स्टेशन लेकर पहुंचे, जहां से पुलिस ने उन्हें इलाज के लिए नानावटी अस्पताल पहुंचाया।
कोटा से गिरफ्तारी और आगे की जांच
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अंधेरी रेलवे स्टेशन के पास अपनी बाइक छोड़कर ट्रेन से भागने की फिराक में थे। वे पुणे-जयपुर एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में बैठकर दिल्ली और फिर वहां से नेपाल भागने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, मुंबई पुलिस से समय पर इनपुट मिलने के कारण राजस्थान की कोटा पुलिस ने मात्र 15 मिनट के भीतर जाल बिछाकर तीनों आरोपियों को धर दबोचा।
फिलहाल, पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इन शूटर्स को स्थानीय स्तर पर किसने मदद पहुंचाई थी, उन्हें हथियारों की सप्लाई किसने की थी और इस पूरी साजिश के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के स्लीपर सेल या अन्य कौन-कौन लोग सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।







