Tiger Shroff Firing Case : बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) पर मुंबई के जुहू इलाके में हुए फायरिंग हमले के मामले में पुलिस ने बेहद तेजी दिखाते हुए महज 15 घंटों के भीतर सभी आरोपियों को राजस्थान के कोटा से दबोच लिया है। इस मामले में पुलिस जांच और खुलासों से जुड़ी हर एक बड़ी और अहम बात को आइए विस्तार से जानते हैं।
कैसे हुआ था हमला? (घटना का पूरा घटनाक्रम)
रविवार की रात अभिनेता टाइगर श्रॉफ मुंबई के जुहू स्थित एक फुटबॉल क्लब से बाहर निकले थे। वह अपनी कार की फ्रंट सीट पर बैठे थे और शीशा चढ़ा होने के बावजूद हाथ हिलाकर अपने फैंस का अभिवादन कर रहे थे। तभी अचानक कुछ हमलावरों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।
सामने आए वीडियो में एक हमलावर दोनों हाथों से बंदूक थामे कार पर फायरिंग करता दिखा, जबकि दूसरा शख्स साइड से गोली चला रहा था। हालांकि गनीमत यह रही कि टाइगर श्रॉफ को कोई सीधी गोली नहीं लगी, लेकिन कार के शीशे टूटने और बारूद व कांच के टुकड़ों से उनके बाएं हाथ में मामूली चोटें आईं। इस फायरिंग में टाइगर के ड्राइवर के अलावा एक ऑटो-रिक्शा चालक भी घायल हो गया।
50,000 रुपये एडवांस और 10 दिन की रेकी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए इन तीनों आरोपियों को इस जानलेवा हमले को अंजाम देने के लिए 50,000 रुपये की एडवांस रकम दी गई थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये हमलावर पिछले करीब 10 दिनों से टाइगर श्रॉफ की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने अभिनेता के घर और जिम की भी पूरी रेकी की थी। फायरिंग से ठीक पहले उन्होंने 45 मिनट तक उस पूरे इलाके की मुखबिरी की थी। वे सोशल मीडिया पर पापराजी (Paparazzi) के वीडियो और ब्लॉगर्स के कंटेंट से टाइगर की लोकेशन और दिनचर्या की पल-पल की जानकारी जुटा रहे थे।
मुंबई से कोटा और नेपाल भागने का प्लान
फायरिंग की घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर एसवी रोड से होते हुए अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी बाइक छोड़ दी और लोकल ट्रेन पकड़कर फरार हो गए। पुलिस ने उनकी वह बाइक पहले ही बरामद कर ली है।
पुलिस के अनुसार, ये तीनों आरोपी जयपुर और दिल्ली के रास्ते नेपाल भागने की फिराक में थे। वे पुणे-भागने वाली एक्सप्रेस (Pune-Jaipur Express) के जनरल डिब्बे में बैठकर दिल्ली जा रहे थे। आपस में संपर्क बनाए रखने के लिए वे लगातार ‘सिग्नल’ (Signal) और ‘telegram’ ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे थे।
कोटा पुलिस का 15 मिनट का ‘ऑपरेशन’ और गिरफ्तारी
मुंबई पुलिस से जैसे ही इनपुट मिला, कोटा की एसपी तेजस्विनी गौतम ने तुरंत अपनी टीम को एक्टिव किया। पुलिस को सूचना मिली थी कि संदिग्ध पुणे-जयपुर एक्सप्रेस से कोटा पहुंचने वाले हैं। कोटा पुलिस ने बिना एक पल गंवाए मात्र 15 मिनट के भीतर ट्रेन में तगड़ा जाल बिछाया और पूरी ट्रेन की सघन तलाशी ली।
सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे कोटा रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को धर दबोचा। हालांकि, चलती ट्रेन में सफर करने के दौरान उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम:
- रेहान उर्फ सुक्का: जो हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला है और मजदूरी करता है।
- ऋतिक कुमार उर्फ रोशन: जो बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है और पिछले कुछ सालों से मुंबई में ही रह रहा था (जो एक रैपिडओ ड्राइवर है)।
- एक नाबालिग आरोपी: तीसरा संदिग्ध आरोपी नाबालिग है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का एंगल और सरकार की चेतावनी
इस पूरे हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ होने की बात सामने आ रही है, हालांकि पुलिस अभी इन दावों और सोशल मीडिया पोस्ट्स की आधिकारिक पुष्टि करने में जुटी है।
घटना के तुरंत बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने देर रात अस्पताल पहुंचकर टाइगर श्रॉफ का हालचाल जाना था और कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि “गोलियों का जवाब गोलियों से दिया जाएगा” और मुंबई में किसी भी तरह के गैंगवार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, कोटा पुलिस इन सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई पुलिस के हवाले कर रही है, जहां इनसे आगे की गहरी पूछताछ की जाएगी।







