Drishyam: The Conclusion Review by Heena Kumawat
Drishyam: The Conclusion Review by Heena Kumawat

Drishyam: The Conclusion Review by Heena Kumawat : बॉलीवुड में सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों की बात हो और ‘दृश्यम’ का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। अजय देवगन स्टारर ‘दृश्यम: द कंक्लूजन’ (Drishyam: The Conclusion) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और इसे लेकर दर्शकों में गजब का क्रेज है। जाने-माने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘फिल्म विंडो’ (Film Window) पर अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली लोकप्रिय पत्रकार हिना कुमावत ने इस 150 मिनट की फिल्म का बहुत ही शानदार और आसान शब्दों में रिव्यू किया है। आइए जानते हैं कि हिना कुमावत के मुताबिक यह फिल्म देखने लायक है या नहीं।

क्या है फिल्म की कहानी और नया ट्विस्ट?

‘फिल्म विंडो’ के रिव्यू में पत्रकार हिना कुमावत ने बताया है कि कहानी वहीं से और ज्यादा दिलचस्प हो जाती है जहां एक बेबस मां अपने बच्चे के लिए न्याय की भीख मांग रही है। उसकी सीधी टक्कर होती है शातिर दिमाग विजय सागांवकर यानी अजय देवगन से। इस बार ट्विस्ट यह है कि पुलिस को विजय के खिलाफ कुछ नए और पुख्ता सबूत मिल गए हैं, जिसकी वजह से पुराना बंद हुआ केस फिर से खुल जाता है।

हिना के अनुसार, कहानी का यह नया सफर आपको पहले मिनट से लेकर आखिर तक अपनी सीट से हिलने नहीं देता, क्योंकि हर एक सीन पर दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं।

अजय देवगन और जयदीप अहलावत का आमना-सामना

इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसके दमदार कलाकार हैं। ‘फिल्म विंडो’ के विश्लेषण के मुताबिक, जब-जब स्क्रीन पर अजय देवगन और नए जुड़े कलाकार जयदीप अहलावत (Jaideep Ahlawat) आमने-सामने आते हैं, तब-तब सिनेमाघरों में सीटी बजने वाला माहौल बन जाता है।

जयदीप अहलावत की धांसू एंट्री: एसपी क्राइम ब्रांच के रूप में राजवीर सिंह तोमर का किरदार निभा रहे जयदीप अहलावत ने पर्दे पर गजब का खौफ और स्टाइल दिखाया है। उनकी एक्टिंग में एक अलग ही दम नजर आता है।

अजय देवगन की आंखें: विजय के रोल में अजय देवगन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बिना ज्यादा बोले सिर्फ आंखों के इशारों से सस्पेंस कैसे पैदा किया जाता है।

बाकी स्टार्स की एक्टिंग: फिल्म में श्रिया सरन (नंदिनी), तब्बू और रजत कपूर ने हमेशा की तरह बेहतरीन काम किया है। वहीं, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के रूप में प्रकाश राज का दमदार अंदाज देखने लायक है। इसके अलावा, कमलेश सावंत के जोक्स और कॉमिक पंच गंभीर माहौल में भी आपको हंसाने पर मजबूर कर देते हैं।

कोर्टरूम ड्रामा और हिना कुमावत का फाइनल वर्डिक्ट

‘फिल्म विंडो’ की फाउंडर हिना कुमावत ने अपने रिव्यू में डायरेक्टर अभिषेक पाठक के काम की खूब तारीफ की है। हालांकि, हिना का यह भी मानना है कि फिल्म के कोर्टरूम ड्रामा में ‘मीरा बनाम विजय’ के टकराव को और ज्यादा गहराई से दिखाया जाना चाहिए था। चूंकि यह असली लड़ाई एक तरफ अपने बच्चे के लिए तड़प रही बेबस मां और दूसरी तरफ परिवार को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने वाले शातिर क्रिमिनल के बीच की थी, इसलिए स्क्रीन पर दोनों के बीच और अधिक कड़े और तीखे आमने-सामने के सीन्स देखने की उम्मीद थी।

इसके बावजूद, अगर आपको थ्रिलर फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म आपको बिल्कुल निराश नहीं करेगी। पत्रकार हिना कुमावत के मुताबिक यह इस साल की बेहतरीन फिल्मों में से एक है।

फिल्म विंडो रेटिंग: 5 में से 4 स्टार्स ⭐⭐⭐⭐

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